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Goddess Lakshmi prayer to overcome Financial crisis

हे , महामाया महालक्ष्मी इस दिन दरिद्र भक्त की अर्ज सुनलो माँ ,
हे पद्मप्रिये विष्णुविलासिनि अब यह संकट को तारो माँ |
सुख -दुःख तो है सांसारिक भवसागर उसमे तुम ममता की नैय्या ,
चंचल रूप तुम्हारा देख हर मनुष्य की मिलती है दुःख की शैय्या |
ब्रम्हांड बना उत्पत्ति का सूचक , तुम दया की हो टकसाल,
वास्तविक रूप में जन जन के घर में निवास करती हो, ए ऊर्जावान ,
मै मुर्ख अपनी अज्ञानता में करता रहा तुम्हारा तिरस्कार,
किस मुख से करू अर्चना , भोग रहा हु तुम्हारा क्रोध विकराल |
स्वाधिस्ठान में तुम हो विराजित , मैंने पीड़ित किया तुम्हे दिन रात,
सत्य और ज्ञान का आधार हो तुम , न जान सका इस श्रुष्टि का विधान,
तुम्हारी चंचलता को देख , मन में अस्थिरता छायी ,
मस्तिस्क हो गया रोग ग्रस्त , नाना प्रकार की यातना आयी |
जन -मानस में हो तुम ज्ञान का प्रकाश , हे माँ उन् सब पे दया करो ,
अपनी स्तंभित कर देने वाली आभा से , उनका भाग्य प्रकशित करो |
नित चर एवम स्थिर रूप में उनके घर में निवास करो,
अपनी ममता से उन्हें दिन प्रतिदिन पोषित करो ,
अज्ञान रूपी उन्माद प्रत्येक मनुष्य के अंदर जागेगा ,
उसके आत्मा की पगडण्डी बनकर , उनका मार्ग प्रशस्त करो |
लक्ष्मी निहित हर प्रकार की ऊर्जा उस दिन मनुष्य के मन घर कर जाए ,
चाहकर भी वो मनुष्य अवचेतन ना हो पाए , भक्ति के सत्यार्थ को पान कर ,
वो फिर झिलमिलाये |
प्रारब्ध के बदलने की इच्छा उसे जगाये |
हो पुरुषार्थ की मूरत तुम आंतरिक भ्रमांड का संतुलन बनो ,
हर रूप में पूजी जाती हो तुम , अब नीज जन का उद्धार करो |
मनुष्य है दैवी और राक्षसःशी गुणों का धर्ता ,
उसका तुम आध्यात्म ज्ञान बनो, अपनी इस श्रुष्टि को फिर से नैतिक और ऊर्जावान करो|
भोग रहा है , भक्त तुम्हारा दारिद्रय की बेला को,
हर क्षण बना उपहास का पात्र , हुआ अपमानित हर गोधूलि बेला को ,
मनके , चांदी , सोना , वस्त्र एवम नाना अलंकार मिले ,
बनके स्थिर घर -प्रांगण में प्रत्येक प्राणी मनुष्य को प्रफुल्लित करे |
अनेको कुकर्मो से युक्त इस पदभ्रस्ट भक्त के मार्गदर्शक बने |
हो मनोकामना यह मेरी पूरी , हर मनुष्य को कष्ट से मुक्ति मिले ,
हर साधारण कर्म में असाधारणता की अनुभूति मिले |
हो जाये हर रोगो से मुक्ति , रोजगार के नए आसार खुले ,
हे माँ ! स्वीकार करो इस दरिद्र की भक्ति ,
समाप्त करते हुए यह स्तोत्र मुझे मेरी भक्ति प्रसाद मिले |
|| जय माँ महालक्ष्मी ||

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Published by AnkiitzB'sen

Knowingly follower of unknown..........

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